बिहार में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की जा रही है। पटना–गया–डोभी फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) को "ग्रीन कॉरिडोर" के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है। इस परियोजना को लेकर राज्य के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
📌 क्या है ग्रीन कॉरिडोर योजना?
इस योजना के तहत हाईवे के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर पेड़ लगाए जाएंगे, जिससे सड़क के किनारे हरियाली बढ़ेगी और पर्यावरण को फायदा मिलेगा। यह सिर्फ सौंदर्य बढ़ाने का काम नहीं है, बल्कि इसे पर्यावरण संतुलन और आर्थिक विकास से भी जोड़ा गया है।

पहले चरण में लगभग 65 किलोमीटर क्षेत्र को चुना गया है
इस हिस्से में करीब 21,500 पौधे लगाए जाएंगे
योजना 2026-27 से शुरू होकर 2028-29 तक पूरी होने का लक्ष्य है
🌳 कौन-कौन से पेड़ लगाए जाएंगे?
इस ग्रीन कॉरिडोर की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ साधारण पेड़ नहीं, बल्कि फलदार और उपयोगी पेड़ लगाए जाएंगे।
आम
लीची
अमरूद
कटहल
नींबू
आंवला
सहजन
पीपल, नीम, बरगद जैसे छायादार पेड़
इन पेड़ों से न केवल पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि किसानों को आर्थिक लाभ भी मिलेगा।
👨🌾 किसानों को कैसे होगा फायदा?
सरकार इस योजना में स्थानीय किसानों की भागीदारी भी सुनिश्चित कर रही है।
किसानों को पौधारोपण और देखभाल की ट्रेनिंग दी जाएगी
उन्हें प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) भी मिलेगी
उनकी जमीन पर भी पेड़ लगाए जा सकते हैं
भविष्य में फल उत्पादन से अतिरिक्त आय होगी
इस तरह यह योजना "ग्रीन + इनकम" मॉडल पर आधारित है।
🏗️ मंत्री के निर्देश और प्रशासनिक तैयारी
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि:
स्थल निरीक्षण किया जाए
पौधारोपण के लिए उपयुक्त जगह तय की जाए
सभी विभागों और स्थानीय निकायों के साथ समन्वय किया जाए
एक नोडल अधिकारी (हरियाली मिशन निदेशक) नियुक्त किया गया है
इसके अलावा, इस परियोजना को सफल बनाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय लोगों से भी सुझाव लिए जाएंगे।
🌱 पर्यावरण और विकास पर असर
इस ग्रीन कॉरिडोर के बनने से कई बड़े फायदे होंगे:
सड़क किनारे हरियाली बढ़ेगी
वायु प्रदूषण में कमी आएगी
तापमान नियंत्रण में मदद मिलेगी
जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) को बढ़ावा मिलेगा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी
📊 निष्कर्ष
पटना–गया–डोभी NH को ग्रीन कॉरिडोर में बदलने की यह योजना बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी।
अगर यह योजना सफल होती है, तो भविष्य में बिहार के अन्य हाईवे भी इसी मॉडल पर विकसित किए जा सकते हैं।